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निरक्षरता की बुराई को दूर करना चाहते थे पी.एन. पणिक्कर : राम नाथ कोविंद

नई दिल्ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा कि स्वर्गीय पी.एन. पणिक्कर निरक्षरता की बुराई को दूर करना चाहते थे। उन्होंने एक बहुत सरल और बड़...



नई दिल्ली। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा कि स्वर्गीय पी.एन. पणिक्कर निरक्षरता की बुराई को दूर करना चाहते थे। उन्होंने एक बहुत सरल और बड़े शक्तिशाली संदेश वायचु वलारुका का प्रचार किया, जिसका अर्थ है- पढ़ो और बढ़ो। राष्ट्रपति पूजाप्पुरा, तिरुवनंतपुरम में पी.एन. पणिक्कर की प्रतिमा का अनावरण करने के बाद जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि श्री पणिक्कर ने पुस्तकालयों और साक्षरता को एक जन आंदोलन बनाया। 

वास्तव में उन्होंने इसे एक लोकप्रिय सांस्कृतिक आंदोलन बना दिया है। राष्ट्रपति ने कहा कि केरल की एक अनूठी विशेषता यह है कि राज्य के हर गांव में, यहां तक ​​कि दूर-दराज के गांवों में भी पुस्तकालय हैं और लोग अपने गांव में किसी मंदिर, मस्जिद, चर्च या स्कूल से जुड़कर जिस प्रकार का विशेष जुड़ाव अनुभव करते हैं वैसा ही भावनात्मक जुड़ाव यहां के लोग किसी पुस्तकालय के साथ जुड़कर महसूस करते हैं। 

श्री पणिक्कर के आंदोलन द्वारा स्थापित किए गए पुस्तकालय बाद में सभी सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के तंत्रिका केंद्र बन गए, जिनका केरल के साक्षरता अभियान में प्रभावशाली उदाहरण है। उन्होंने कहा कि केरल की संस्कृति में पुस्तकालयों का केंद्रीय स्थान होने का श्रेय पी.एन. पणिक्कर को जाता है, जिन्होंने आम लोगों को पुस्तकालयों से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि पणिक्कर ने अब 50 छोटे पुस्तकालयों के साथ वर्ष 1945 में जो ‘ग्रंथशाला संगम’ शुरू किया था वह अब हजारों पुस्तकालयों के एक बड़े नेटवर्क में विकसित हो गया है। 

उन्होंने कहा कि पुस्तकालयों के इस विशाल नेटवर्क के माध्यम से केरल की आम जनता नारायण गुरु, अय्यंकाली, वी.टी. भट्टाथिरीपाद और अन्य महान गुरुओं के विचारों और आदर्शों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकती हैं। केरल के एक औसत व्यक्ति के महानगरीय दृष्टिकोण का पता श्री पणिक्कर के पुस्तकालय और साक्षरता आंदोलन से लगाया जा सकता है।

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