रायपुर। प्रदेश में कुत्तों के काटने की घटनाएं अब केवल पशु-मानव टकराव नहीं रहीं, बल्कि यह एक गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य संकट क...
रायपुर।
प्रदेश में कुत्तों के काटने की घटनाएं अब केवल पशु-मानव टकराव नहीं रहीं,
बल्कि यह एक गंभीर सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुकी
हैं। हर माह औसतन करीब 13 हजार और प्रतिदिन 425 लोग डाग बाइट का शिकार हो
रहे हैं। आइडीएसपी (एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम) के आंकड़े स्थिति की
भयावहता को उजागर करते हैं। वर्ष 2023 में प्रदेश में कुत्तों के काटने के
1.14 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 1.35 लाख
हो गई, जबकि 2025 में हालात और बिगड़ते हुए 1.55 लाख से अधिक मामलों की
पुष्टि हुई। वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2025 में प्रदेश भर में कुत्तों
के काटने के मामलों में 35.96 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो खतरे
के लगातार बढ़ने का स्पष्ट संकेत है।



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