कोरबा। जिले में बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां मृत खाताधारक की फिक्स्ड डिपाजिट (एफडी) ...
कोरबा। जिले में बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां मृत खाताधारक की फिक्स्ड डिपाजिट (एफडी) से ठगों ने सात लाख 10 हजार रुपये निकाल लिए। ठगों ने न केवल बैंक खाते में दर्ज मोबाइल नंबर बदला, बल्कि खुद को बैंक कर्मचारी बताकर मृतक के घर पहुंचकर एफडी के मूल दस्तावेज भी अपने कब्जे में ले लिए।
कहां का है मामला
मामला दीपका थाना क्षेत्र के ग्राम रंजना का है। पीड़िता चंचल जायसवाल के अनुसार, उनके ससुर मेवालाल जायसवाल का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में खाता था। मेवालाल ने 19 अप्रैल 2024 को आठ लाख रुपये की एफडी कराई थी, जिसकी परिपक्वता 23 मई 2025 को होनी थी। एफडी पर कुल 8.70 लाख रुपये मिलने थे। खाते में नामिनी के रूप में पोते अथर्व जायसवाल का नाम दर्ज था।
एफडी परिपक्व होने से पहले ही 19 फरवरी 2025 को मेवालाल जायसवाल का निधन हो गया। इसके बाद परिवार को अंदाजा भी नहीं था कि बैंक खाते को निशाना बनाकर ठग गिरोह पूरी योजना के साथ सक्रिय हो चुका है।
कब हुआ मामले का खुलासा
परिपक्वता के बाद जब 10 दिसंबर 2025 को चंचल जायसवाल यूनियन बैंक की चैतमा शाखा पहुंचीं, तब मामले का खुलासा हुआ। बैंक कर्मचारियों ने बताया कि खाते में दर्ज मोबाइल नंबर बदला जा चुका है। स्टेटमेंट निकलवाने पर सामने आया कि करीब 7.10 लाख रुपये पहले ही किसी अन्य खाते में ट्रांसफर कर दिए गए हैं।
पीड़िता का आरोप है कि इससे पहले कुछ लोग यूनियन बैंक के कर्मचारी बनकर उनके घर आए थे और एफडी से जुड़े मूल दस्तावेज साथ ले गए थे। इसके बाद से ही उन्हें संदेह बना हुआ था। रकम गायब होने के बाद ठगी की पुष्टि हुई।
प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल
चंचल जायसवाल ने बैंक प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। बिना खाताधारक या नामिनी की मौजूदगी के मोबाइल नंबर बदलने को लेकर उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पुलिस को आशंका है कि यह संगठित ठग गिरोह की करतूत है। दीपका पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ठगों की पहचान और बैंक कर्मचारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। यह मामला न केवल लोगों को सतर्क करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि क्या खाताधारक की मृत्यु के बाद उसका बैंक खाता सुरक्षित रहता है।
ये पांच सावधानियां अपनाएं
घर पर आए बैंक कर्मचारी पर आंख बंद कर भरोसा न करें।
बिना लिखित सूचना, आईडी कार्ड और शाखा से पुष्टि के कोई कर्मचारी मूल दस्तावेज नहीं लेता।
खाताधारक के निधन के तुरंत बाद बैंक को लिखित सूचना दें।
मृत्यु प्रमाण पत्र जमा कर खाते को डेबिट फ्रीज कराने का अनुरोध करें।
मोबाइल नंबर, ई-मेल और केवाईसी की नियमित जांच करें तथा पासबुक व स्टेटमेंट देखते रहें।



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