इंदौर। मध्य प्रदेश के पहलवान उदित पटेल शुक्रवार को करीब 23 घंटे की यात्रा कर अल्बेनिया से भारत लौटे। विश्व रैंकिंग कुश्ती चैंपियनशिप मे...
इंदौर।
मध्य प्रदेश के पहलवान उदित पटेल शुक्रवार को करीब 23 घंटे की यात्रा कर
अल्बेनिया से भारत लौटे। विश्व रैंकिंग कुश्ती चैंपियनशिप में हिस्सा लेने
गए उदित को दो मार्च को भारत लौटना था। मगर पश्चिम एशिया में युद्ध के
हालात के चलते उनकी यात्रा प्रभावित हुई। अल्बेनिया के शहर तिरान में
आयोजित विश्व रैंकिंग कुश्ती चैंपियनशिप में हिस्सा लेने भारतीय टीम पहुंची
थी।
भारतीय कुश्ती टीम में मध्य प्रदेश के दो पहलवान शामिल थे।
इनमें उदित के अलावा महिला पहलवान प्रियांशी प्रजापत भी थी। प्रियांशी ने
स्पर्धा में रजत पदक जीता था। वे गुरुवार को भारत लौट आई थीं जबकि उदित एक
दिन की देरी से शुक्रवार को भारत पहुंचे। पुरुषों के ग्रीकोरोमन शैली के
पहलवान उदित का यह पहला ही अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था। उन्होंने बहुत
अच्छी कुश्ती लड़ी, लेकिन अनुभव की कमी के चलते पदक से वंचित रह गए।
खंडवा
के छोटी बोरगांव के निवासी उदित पटेल स्थानीय श्रीकृष्ण व्यायामशाला में
अभ्यास करते हैं। भारत लौटने के बाद चर्चा करते हुए उदित ने बताया कि मुझे
मैं पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहा था। मैं भले
ही पदक नहीं जीत सका, लेकिन वहां से अनुभव लेकर लौटा हूं। यह अनुभव आगामी
अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में मेरे काम आएगा। अब मैं आगामी एशियन
चैंपियनशिप की तैयारियों पर ध्यान दे रहा हूं।
एशियन चैंपियनशिप के
लिए भारतीय टीम के चयन ट्रायल्स 10 मार्च को होना थे, लेकिन युद्ध के हालात
में फंसे होने से भारतीय पहलवानों की तैयारियां प्रभावित हुई हैं। जिसके
चलते भारतीय कुश्ती महासंघ के अब चयन ट्रायल्स 17 मार्च को लखनऊ में कराने
का फैसला किया है। उदित ने बताया कि हम अल्बेनिया के शहर तिरान से गुरुवार
को स्थानीय समयानुसार दोपहर तीन बजे रवाना हुए थे। यहां से इस्तांबुल होते
हुए अल्माटी पहुंचे और वहां से दोपहर करीब दो बजे दिल्ली पहुंचे थे।
भारतीय
कुश्ती टीम का अभ्यास शिविर लखनऊ में आयोजित है तो हम वहां से शाम सात बजे
के करीब लखनऊ पहुंच गए। अब यहीं पर रहकर ट्रायल्स की तैयारी करूंगा।
उल्लेखनीय है कि भारतीय पहलवानों को पहले दुबई के रास्ते भारत लौटना था।
मगर अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद पश्चिम एशिया में हालात
तेजी से बिगड़े। युद्ध की आंच दुबई तक भी पहुंची और वहां विमान सेवाएं
प्रभावित हुई। इससे भारतीय कुश्ती टीम भी अटक गई थी।



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