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खाड़ी में उतरे 7,000 अमेरिकी कमांडो, क्या जमीनी हमला करेगा अमेरिका?

    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध अब और गहरी हो गई है। अमेरिका के 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के चार हफ्ते पूरे होने के बाद भी ...

  

 नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध अब और गहरी हो गई है। अमेरिका के 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के चार हफ्ते पूरे होने के बाद भी खाड़ी क्षेत्र युद्ध के उस मुहाने पर खड़ा है, जैसा नजारा इराक युद्ध के बाद कभी नहीं देखा गया। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप तेहरान के साथ बातचीत का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ हजारों अमेरिकी सैनिकों का कारवां ईरान की घेराबंदी के लिए बढ़ रहा है।
ईरान के 9,000 ठिकानों पर प्रहार और होर्मुज की घेराबंदी

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, अब तक ईरान के 9,000 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है, जिसमें बैलिस्टिक मिसाइल यूनिट्स से लेकर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के मुख्यालय तक शामिल हैं। तनाव की असली वजह 'होर्मुज जलडमरूमध्य' बनी हुई है। दुनिया के 20 फीसदी तेल व्यापार का रास्ता रोकने की ईरान की कोशिशों के जवाब में अमेरिका ने अब अपनी थल सेना और नौसेना की सबसे घातक टुकड़ियों को मोर्चे पर उतार दिया है।

समुद्री बेड़े: ट्रिपोली और बॉक्सर स्ट्राइक ग्रुप का मिशन

खाड़ी की ओर बढ़ रही अमेरिकी कुमक में सबसे महत्वपूर्ण 'यूएसएस ट्रिपोली एम्फीबियस रेडी ग्रुप' है। इसमें 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट (MEU) शामिल है। यह बेड़ा मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत तक युद्ध क्षेत्र में तैनात हो जाएगा। 'यूएसएस ट्रिपोली' एक हल्के विमानवाहक पोत की तरह काम करता है, जो F-35B जैसे आधुनिक जेट्स और मरीन सैनिकों को समुद्र व हवा, दोनों रास्तों से उतारने में सक्षम है।

इसके पीछे कैलिफोर्निया से 'यूएसएस बॉक्सर' ग्रुप रवाना हुआ है, जिसमें 2,200 मरीन सैनिक सवार हैं। इसकी रवानगी को तय समय से तीन हफ्ते पहले तेज कर दिया गया है, जो अमेरिका की आक्रामक रणनीति को दर्शाता है।
आसमान से प्रहार: 82nd एयरबोर्न डिवीजन की तैनाती

जमीनी मोर्चे को मजबूती देने के लिए पेंटागन ने अपनी सबसे विशिष्ट 'इमीडिएट रिस्पांस फोर्स' यानी 82nd एयरबोर्न डिवीजन के करीब 2,000 सैनिकों को आदेश दिया है। फोर्ट ब्रैग स्थित यह डिवीजन आदेश मिलने के मात्र 18 घंटों के भीतर दुनिया के किसी भी कोने में पैराशूट के जरिए उतर सकती है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयान ने हलचल और बढ़ा दी है, जिसमें उन्होंने ईरान के भीतर घुसकर परमाणु सामग्री को सुरक्षित करने की संभावना जताई है।
7,000 अतिरिक्त सैनिकों का जत्था और 'पिंसर मूवमेंट'

वर्तमान में यूएसएस अब्राहम लिंकन स्ट्राइक ग्रुप पहले से ही सक्रिय है। नए मरीन और एयरबोर्न सैनिकों को मिलाकर करीब 7,000 जवान इस मोर्चे पर जुड़ रहे हैं। यह कॉम्बिनेशन समुद्र से मरीन कमांडो और आसमान से पैराट्रूपर्स के जरिए ईरान के खिलाफ 'पिंसर मूवमेंट' (दोतरफा घेराबंदी) बनाने की तैयारी की ओर इशारा कर रहा है।

ईरान ने भी पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। 140 से ज्यादा ईरानी जहाजों के तबाह होने के बावजूद तेहरान रोजाना ड्रोन और मिसाइल हमले जारी रखे हुए है। आने वाले दो हफ्ते यह तय करेंगे कि ये 7,000 सैनिक सिर्फ 'बैकअप' हैं या किसी बड़े जमीनी आक्रमण की शुरुआती लहर।

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