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रायपुर के चौक-चौराहों के नाम बदले जाएंगे, बलिदानियों को नई पहचान

    रायपुर: रायपुर नगर निगम ने शहर के ऐतिहासिक चौकों और प्रमुख मार्गों के नाम बदलने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव के तहत अंग्रेजो...

  


रायपुर: रायपुर नगर निगम ने शहर के ऐतिहासिक चौकों और प्रमुख मार्गों के नाम बदलने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव के तहत अंग्रेजों के समय के प्रसिद्ध सिटी कोतवाली चौक का नाम बदलकर “जैन स्तंभ चौक” किया जाएगा। यह प्रस्ताव मेयर-इन-काउंसिल (MIC) में पारित हो चुका है और अंतिम स्वीकृति के लिए सोमवार को होने वाली सामान्य सभा में रखा जाएगा।
कोतवाली चौक का ऐतिहासिक महत्व

सिटी कोतवाली चौक का इतिहास 1854 से जुड़ा हुआ है, जब यह अंग्रेजों के शासनकाल में स्थापित हुआ था। यह स्थान पहले अंग्रेजों की कचहरी और बंदी गृह के रूप में उपयोग किया जाता था। बाद में 1903 में इसे पुलिस थाने का दर्जा मिला। यह चौक स्वतंत्रता संग्राम का भी साक्षी रहा है। वर्तमान में यहां वर्षों से जैन स्तूप (स्तंभ) स्थापित है, जिसके चलते जनभावना को ध्यान में रखते हुए इसका नाम बदलने का प्रस्ताव सामने आया है।

बदलाव के पीछे निगम का तर्क

निगम प्रशासन का कहना है कि शहर में जैन समाज की बड़ी उपस्थिति और चौक पर पहले से मौजूद जैन स्तंभ को देखते हुए यह नाम परिवर्तन किया जा रहा है। इसके अलावा अन्य स्थानों के नाम बलिदानियों और सेनानियों के नाम पर रखने से शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा मिलेगी।
बलिदानियों की प्रतिमाएं होंगी स्थापित

निगम द्वारा शहर के विभिन्न स्थानों पर शहीदों और वीरों की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएंगी। लाखे नगर चौक पर सुकमा में शहीद हुए एएसपी आकाश राव गिरेपुंजे की प्रतिमा लगेगी। साइंस कॉलेज गार्डन में मेजर यशवंत गोविंद गोरे की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। वहीं शंकर नगर (सेक्टर-दो) में मेजर सत्य प्रदीप दत्ता की प्रतिमा उद्यान में लगाई जाएगी। आयुर्वेदिक कॉलेज गेट पर वीर सावरकर की प्रतिमा स्थापित करने की योजना है।
मार्गों के नाम भी बदलेंगे

शहर के कई प्रमुख मार्गों के नाम भी बदले जाएंगे। देवेंद्र नगर चौक (श्मशान के पास) से पंडरी कपड़ा मार्केट तक जाने वाली सड़क को “अयोध्या प्रसाद जैन मार्ग” नाम दिया जाएगा। वार्ड-15 में मारुति मंगलम से दही हांडी मैदान तक के मार्ग का नाम “महेश पथ” रखा जाएगा।
नई पहचान की ओर शहर

इसके अलावा लाखे नगर चौक पर सहकारिता के जनक पं. वामन बलीराम लाखे की प्रतिमा उनके नाम के स्तंभ पर स्थापित की जाएगी, जिसका खर्च फाउंडेशन द्वारा उठाया जाएगा। इस पहल से रायपुर शहर को नई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान मिलने की उम्मीद है।

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