रायपुर: अंबिकापुर के 19 वर्षीय युवक में ऐसी दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी सामने आई है, जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया है। बचपन से मछली जै...
रायपुर: अंबिकापुर के 19 वर्षीय युवक में ऐसी दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी सामने आई है, जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया है। बचपन से मछली जैसी त्वचा वाले इस युवक का हार्ट केवल 30 प्रतिशत काम कर रहा है, जबकि दोनों किडनियां पूरी तरह खराब हो चुकी हैं।
आंबेडकर अस्पताल में इलाज के दौरान पता चला कि वह एक्स-लिंक्ड इचिथियोसिस से पीड़ित है, जो आमतौर पर सिर्फ त्वचा को प्रभावित करती है, लेकिन इस मामले में शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर असर पड़ा है। युवक का इलाज राजधानी के आंबेडकर अस्पताल में चल रहा है, जहां उसे डायलिसिस पर रखा गया है।
डॉक्टरों के अनुसार युवक ‘एक्स-लिंक्ड
इचिथोसिस’ नाम की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है, जो क्रोमोसोम और एसटीएस जीन
में बदलाव के कारण होती है। इस केस की खास बात यह है कि त्वचा, हार्ट और
किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याएं एक साथ सामने आई हैं, जो मेडिकल साइंस में
बेहद दुर्लभ मानी जाती हैं। विशेषज्ञ इसे देश का पहला और दुनिया के चुनिंदा
मामलों में से एक बता रहे हैं।
यह है एक्स-लिंक्ड इचिथोसिस
एक्स-लिंक्ड
इचिथोसिस एक दुर्लभ आनुवांशिक त्वचा रोग है, जिसमें त्वचा अत्यधिक सूखी,
खुरदरी और मछली के स्केल जैसी हो जाती है। यह बीमारी शरीर में स्टेरायड
सल्फेटेज एंजाइम की कमी के कारण होती है। यह आमतौर पर जन्म से ही दिखाई
देने लगती है और उम्र के साथ इसके लक्षण बढ़ते हैं। मेडिकल रिसर्च के
अनुसार यह बीमारी पुरुषों में ज्यादा पाई जाती है और इसका सीधा संबंध एक्स
क्रोमोसोम से होता है।
हार्ट और किडनी भी प्रभावित
इस
केस में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि युवक की त्वचा की बीमारी के
साथ-साथ उसका हार्ट और किडनी भी गंभीर रूप से प्रभावित है। डॉक्टरों के
अनुसार उसका हार्ट केवल 30 प्रतिशत काम कर रहा है और दोनों किडनियां पूरी
तरह खराब हो चुकी हैं। ऐसे मामलों में आमतौर पर एक ही अंग प्रभावित होता
है, लेकिन तीनों अंगों का एक साथ प्रभावित होना बेहद दुर्लभ है। इसी वजह से
इस केस को रेयरेस्ट आफ द रेयर माना जा रहा है।
डायलिसिस पर निर्भर जीवन
युवक
की हालत को देखते हुए उसे फिलहाल डायलिसिस पर रखा गया है, ताकि शरीर से
विषैले तत्वों को बाहर निकाला जा सके। डाक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट की
सलाह दी है, जिससे वह सामान्य जीवन जी सके। परिवार के अनुसार पिछले एक माह
से युवक का इलाज आंबेडकर अस्पताल में चल रहा है। उसकी सांस और शरीर के
संतुलन को बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
लक्षणों के अनुसार ही इलाज संभव
डॉक्टरों
का कहना है कि इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज फिलहाल उपलब्ध नहीं है। मरीज
को लक्षणों के आधार पर ही उपचार दिया जाता है। त्वचा को नम बनाए रखने के
लिए गाढ़े लोशन और क्रीम का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा यूरिया,
लैक्टिक एसिड और सैलिसिलिक एसिड जैसे तत्वों का उपयोग पपड़ी हटाने में मदद
करता है। हार्ट और किडनी की समस्या के लिए अलग-अलग विशेषज्ञों की निगरानी
में इलाज किया जा रहा है।
रिसर्च के लिए महत्वपूर्ण केस
डॉक्टरों के अनुसार यह केस मेडिकल रिसर्च के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दुनियाभर के जर्नल्स में इस तरह के संयुक्त लक्षणों वाले मामलों की रिपोर्टिंग बहुत कम है। आंबेडकर अस्पताल की टीम मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री और रिपोर्ट तैयार कर रही है। साथ ही बीमारी की सटीक पुष्टि के लिए विशेष जेनेटिक टेस्ट कराने की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस भविष्य में इस बीमारी की समझ और इलाज के लिए नई दिशा दे सकता है।
मरीज में एक्स-लिंक्ड इचिथियोसिस जैसी दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी पाई गई है, जो सामान्यतः केवल त्वचा को प्रभावित करती है, लेकिन इस मामले में हार्ट और किडनी पर भी गंभीर असर देखा गया है। मरीज की दोनों किडनियां पूरी तरह खराब हो चुकी हैं, इसलिए नियमित डायलिसिस किया जा रहा है। किडनी ट्रांसप्लांट ही स्थायी विकल्प हो सकता है।
- डॉ. पुनीत गुप्ता, एचओडी, नेफ्रोलाजी विभाग, आंबेडकर अस्पताल
यह बीमारी जीन में गड़बड़ी के कारण होती है और इसका कोई निश्चित इलाज नहीं है। लक्षणों के आधार पर ही उपचार किया जाता है। उन्होंने बताया कि स्किन को सुरक्षित रखने के लिए नियमित माइश्चराइजिंग, दवाइयों और विशेष क्रीम का उपयोग जरूरी है। साथ ही हार्ट की स्थिति को देखते हुए मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम मरीज की लगातार मानिटरिंग कर रही है।
- डॉ. मनीषा खांडे, किडनी रोग विशेषज्ञ



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