नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। दो सप्ताह का संघर्ष-विराम खत्म होने से ठीक पहले दोनों देशों...
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। दो सप्ताह का संघर्ष-विराम खत्म होने से ठीक पहले दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है, जिससे प्रस्तावित शांति वार्ता पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह इस हफ्ते पाकिस्तान में होने वाली दूसरी शांति वार्ता से पीछे हट सकता है। तेहरान के अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी झंडे वाले एक जहाज को जब्त किए जाने के बाद मौजूदा परिस्थितियों में बातचीत संभव नहीं है।
'संघर्ष-विराम को आगे बढ़ाने की संभावना बेहद कम'
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि संघर्ष-विराम को आगे बढ़ाने की संभावना बेहद कम है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता, तो हालात फिर से हिंसक हो सकते हैं। ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
ईरानी नेतृत्व का आरोप है कि अमेरिका नाकाबंदी और संघर्ष-विराम के उल्लंघन के जरिए बातचीत को दबाव और समर्पण का माध्यम बनाना चाहता है। उनका कहना है कि इस तरह के कदम क्षेत्र में दोबारा युद्ध भड़का सकते हैं।
'ईरान धमकियों के साये में बातचीत नहीं करेगा'
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि ईरान धमकियों के साये में बातचीत नहीं करेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि देश ने बीते दो हफ्तों में सैन्य स्तर पर नई रणनीतियों की तैयारी कर ली है। गालिबाफ ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका या इजरायल के साथ टकराव बढ़ता है, तो ईरान 'नए दांव' के साथ जवाब देगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे विवाद का अहम केंद्र बना हुआ है। यह रणनीतिक क्षेत्र न केवल वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि मौजूदा शांति वार्ता में भी प्रमुख मुद्दा बन चुका है। इसके आसपास लगातार बढ़ती गतिविधियां दोनों देशों के बीच अविश्वास को और गहरा कर रही हैं।
हालांकि, अमेरिका ने पुष्टि की है कि उसका प्रतिनिधिमंडल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पाकिस्तान में होने वाली वार्ता में शामिल होगा। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे, जबकि इसमें मध्य-पूर्व मामलों के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल होंगे।
कूटनीति पर खतरे के संकेत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच किसी संभावित समझौते की रूपरेखा पर आंशिक सहमति बन चुकी थी। लेकिन ट्रंप के हालिया कड़े बयानों और अमेरिकी नीतियों ने इस प्रगति को खतरे में डाल दिया है। एक ईरानी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि अमेरिका का आक्रामक रुख और सार्वजनिक बयानबाजी, वार्ता प्रक्रिया के लिए सबसे बड़ी बाधा बनते जा रहे हैं।
फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश तनाव कम कर कूटनीतिक रास्ता अपनाते हैं, या फिर क्षेत्र एक बार फिर बड़े टकराव की ओर बढ़ता है।



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