Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

ब्रेकिंग

latest

भाजयुमो में उलझन, भिलाई मंडल में एक साथ दो अध्यक्ष घोषित

   भिलाई। भाजपा की युवा शाखा भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) में मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर भिलाई जिले में बड़ा विवाद खड़ा हो गय...

  

भिलाई। भाजपा की युवा शाखा भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) में मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर भिलाई जिले में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। संगठन में समन्वय के अभाव के चलते स्थिति ऐसी बन गई है कि 13 में से 10 मंडलों में दो-दो अध्यक्ष घोषित हो गए हैं।

इस घटनाक्रम ने भाजपा जैसी अनुशासनात्मक पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और संगठन के भीतर चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
13 मंडल अध्यक्षों की एक सूची जारी

भाजपा जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन और भाजयुमो जिला अध्यक्ष सौरभ जायसवाल द्वारा 13 मंडल अध्यक्षों की एक सूची जारी की गई। इस सूची में पश्चिम मंडल के लिए आयुष उपाध्याय, पूरब मंडल में भास्कर राव, खुर्सीपार मंडल में मनीष चौधरी, वैशाली नगर में रतन शर्मा, सुपेला में अनुराग मारकंडे, काेहका मंडल में मनदीप सिंह, कैंप मंडल में चंदन यादव, जामुल में मनीष साहू, भिलाई- 3 संदीप पाली और चरोदा मंडल में राजेश यादव को अध्यक्ष बनाया गया।

13 में से 10 मंडलों में समानांतर नियुक्तियां हो गईं

इस घोषणा के तुरंत बाद ही नाराज भाजपा के मंडल अध्यक्षों ने इसका विरोध करते हुए अपने-अपने समर्थकों के नामों की घोषणा कर दी। विरोध स्वरूप अमित मिश्रा, आकाश प्रधान, आदित्य टोप्पा, सिद्धार्थ सिंह राजपूत, विवेकानंद सेन, ईश्वर वर्मा, कुणाल गुप्ता, यशवंत राजपूत, महेंद्र साहू और हेमराज साहू जैसे नाम सामने आए।

इससे 13 में से 10 मंडलों में समानांतर नियुक्तियां हो गईं, जिससे संगठन में असमंजस और असंतोष की स्थिति बन गई है। मंडल अध्यक्षों द्वारा दिए गए नामों को महामंत्री बना दिया गया है। विवाद के केंद्र में यह तर्क भी सामने आया है कि परंपरागत रूप से भाजयुमो मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति भाजपा मंडल अध्यक्षों की अनुशंसा और समन्वय से की जाती है।
बिना परामर्श के सीधे नाम घोषित कर दिए गए

मंडल अध्यक्षों का कहना है कि पार्टी की रीति-नीति के अनुसार उनकी सहमति से नाम तय होते हैं, जिसके बाद जिला स्तर पर औपचारिक घोषणा की जाती है। लेकिन इस बार बिना परामर्श के सीधे नाम घोषित कर दिए गए, जो नियमों के विपरीत है। केवल मंडल स्तर ही नहीं, बल्कि भाजयुमो के जिला पदाधिकारियों की घोषणा को लेकर भी असंतोष सामने आया है।

आरोप है कि इस प्रक्रिया में वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों के समर्थकों को नजरअंदाज किया गया। खासतौर पर सांसद विजय बघेल, विधायक रिकेश सेन और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडेय के गुट से जुड़े कार्यकर्ताओं को प्रतिनिधित्व नहीं मिलने की बात कही जा रही है।
एक अध्यक्ष दुष्कर्म के मामले में जेल जा चुका है

इधर घोषणा के बाद भाजपा के नेताओं ने ही बताया की जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन और युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष सौरभ जायसवाल द्वारा घोषित एक मंडल अध्यक्ष दुष्कर्म के मामले में जेल जा चुका है। वही एक और मंडल अध्यक्ष बसों का संचालन करता है जिसके ऊपर कांग्रेसी होने का ठप्पा लगा हुआ है।

संभाग प्रभारी ने समन्वय की बात कही

इस पूरे विवाद पर भाजपा के दुर्ग संभाग प्रभारी जगन्नाथ पाणिग्रही ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सभी नेताओं के बीच बेहतर समन्वय के साथ नियुक्तियां की जानी चाहिए थीं, जो इस बार नहीं हो सकीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे वर्तमान में बाहर हैं और लौटने के बाद बैठक कर मामले का समाधान निकाल लिया जाएगा।

(जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन और युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष सौरभ जायसवाल का मोबाइल बंद मिला)

No comments