रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों के 1.93 लाख शिक्षकों में से 80 हजार से अधिक के लिए अब टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) पास करना जरूरी ...
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों के 1.93 लाख शिक्षकों में से 80 हजार से अधिक के लिए अब टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) पास करना जरूरी हो गया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के पिछले साल जारी निर्देश के बाद लागू हुआ है।
प्रदेश के शिक्षकों में करीब 42 प्रतिशत ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक टीईटी क्वालिफाई नहीं किया है। शिक्षक संगठन लंबे समय से मांग कर रहे थे कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जाए।
सहायक शिक्षक और शिक्षक इस दायरे में शामिल हैं
सरकार ने इसके लिए प्रविधान लाने पर विचार किया। साथ ही विभागीय परीक्षा कराने की भी चर्चा हुई, लेकिन अब तक स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक निर्देश जारी नहीं किया है। प्रदेश में सहायक शिक्षक और शिक्षक इस दायरे में शामिल हैं।
इसके अलावा चार अप्रैल को दिल्ली में आंदोलन की योजना
बनाई है। जो शिक्षक दिल्ली नहीं जा पाएंगे, वे एक दिन का आकस्मिक अवकाश
लेकर हड़ताल में शामिल होंगे।
टीईटी परीक्षा में आठ प्रतिशत शिक्षक ही उत्तीर्ण
20 मार्च को व्यापमं ने टीईटी परीक्षा का परिणाम जारी किया। इस परीक्षा में 87 हजार से अधिक शिक्षकों ने हिस्सा लिया, लेकिन सिर्फ आठ प्रतिशत शिक्षक ही पास हो पाए।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एनसीटीई के निर्देश के आधार पर टीईटी अनिवार्य की है, लेकिन इससे प्रदेश के शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है।
शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने और 2012 के भर्ती नियम लागू होने से पहले टीईटी पास करना शिक्षक चयन की शर्त नहीं थी।



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