मुंबई । बॉलीवुड की चमक-दमक दूर से जितनी खूबसूरत दिखती है, उतनी ही भीतर से थकाने वाली भी हो सकती है। कई कलाकार शोहरत और सफलता के बावजूद ...
मुंबई
। बॉलीवुड की चमक-दमक दूर से जितनी खूबसूरत दिखती है, उतनी ही भीतर से
थकाने वाली भी हो सकती है। कई कलाकार शोहरत और सफलता के बावजूद मन की शांति
की तलाश में आध्यात्मिक राह चुन लेते हैं।
आज हम आपको ऐसी ही एक
एक्ट्रेस की कहानी बताने जा रहे हैं, जो कभी ऐश्वर्या राय और सुष्मिता सेन
को कड़ी टक्कर देती थीं, लेकिन बाद में ग्लैमर की दुनिया छोड़कर
आध्यात्मिकता में लीन हो गईं।
90 के दशक में बॉलीवुड में नई-नई
चेहरे और तीव्र प्रतिस्पर्धा का दौर था। ऐश्वर्या राय, सुष्मिता सेन जैसी
एक्ट्रेसेस ने अपनी खूबसूरती और हुनर से दुनिया भर में अपना झंडा गाड़ा।
इसी समय एक और चेहरा उभरा, जिसने अपनी खूबसूरती, कॉन्फिडेंस और टैलेंट से
इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई - बरखा मदान (Barkha Madan)।
बरखा कभी
मिस वर्ल्ड ऐश्वर्या और मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन को टक्कर देने वाली
कंटेस्टेंट्स में से एक थीं। लेकिन शोहरत के बीच भी उन्हें जिस शांति की
तलाश थी, वह फिल्मों में नहीं बल्कि अध्यात्म में मिली।
बरखा मदान
1994 के फेमिना मिस इंडिया पेजेंट का हिस्सा थीं। इस पेजेंट में सुष्मिता
सेन विनर, ऐश्वर्या राय फर्स्ट रनर-अप और बरखा मदान मिस इंडिया टूरिज्म बनी
थीं।
मॉडलिंग में सफलता के बाद उन्होंने फिल्मों की ओर कदम बढ़ाया
और निर्देशक उमेश मेहरा की फिल्म ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ से बॉलीवुड
डेब्यू किया। उनकी खूबसूरती और अभिनय कौशल ने जल्द ही उन्हें पहचान दिला
दी।
धीरे-धीरे बरखा को महसूस हुआ कि फिल्मों की चमक उन्हें वह सुकून
नहीं दे पा रही जो वे तलाश रही थीं। 2012 में उन्होंने सभी को चौंकाते हुए
एक्टिंग और इंडस्ट्री छोड़ने की घोषणा कर दी। यही नहीं, उन्होंने बौद्ध
भिक्षु बनने का बड़ा फैसला लिया। लामा जोपा रिनपोछे की देखरेख में उन्होंने
दीक्षा ली और अपना नाम बदलकर वेन. ग्याल्टेन समतेन रख लिया।



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