मुंबई । भारतीय संगीत जगत में जब भी सुरीली और कालजयी आवाज की बात होती है, तो लता मंगेशकर के साथ एक ऐसा नाम जरूर जुड़ता है जिसने छह दशकों...
मुंबई
। भारतीय संगीत जगत में जब भी सुरीली और कालजयी आवाज की बात होती है, तो
लता मंगेशकर के साथ एक ऐसा नाम जरूर जुड़ता है जिसने छह दशकों तक श्रोताओं
के दिलों पर राज किया है।
हम बात कर रहे हैं दक्षिण भारत के
सुप्रसिद्ध गायक के.जे. येसुदास (K.J. Yesudas) की, जिन्हें संगीत की
दुनिया में 'गणगंधर्वन' यानी 'दिव्य गायक' के नाम से जाना जाता है।
7 साल की उम्र से शुरू हुआ सुरीला सफर
10
जनवरी 1940 को केरल में जन्मे कट्टसेरी जोसेफ येसुदास को संगीत विरासत में
मिला था। उनके पिता ऑगस्टाइन जोसेफ एक मशहूर शास्त्रीय गायक और स्टेज
एक्टर थे, जो येसुदास के पहले मेंटोर भी बने। महज 7 साल की उम्र में संगीत
की शिक्षा शुरू करने वाले येसुदास ने बाद में महान गुरु चेम्बई वैद्यनाथ
भगवतर से शास्त्रीय गायन की बारीकियां सीखीं।
लता मंगेशकर के बराबर रिकॉर्ड और भाषाई विविधता
येसुदास
की गायिकी की रेंज का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने
अपने 60 साल के करियर में लगभग 50,000 से ज्यादा गाने गाए हैं। यह संख्या
महान गायिका लता मंगेशकर के रिकॉर्ड के बराबर मानी जाती है।



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