जबलपुर । यह कहते हुए रोशन आनंद की आंखें भर आईं। उस शाम वह परिवार के सात अन्य सदस्यों के साथ मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम के क्रूज...
जबलपुर
। यह कहते हुए रोशन आनंद की आंखें भर आईं। उस शाम वह परिवार के सात अन्य
सदस्यों के साथ मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम के क्रूज पर सवार थे।
उनका परिवार बच गया, लेकिन हर किसी की किस्मत मेहरबान नहीं थी। 13 साल की
सिया ने उसी हादसे में मां, छोटे भाई और नानी को खो दिया।
गुरुवार
को जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे में 9 लोगों की मौत हुई, जबकि 4
अब भी लापता हैं। कुछ परिवार अपनों की तलाश में हैं, कुछ के पास सिर्फ
यादें और सदमा है। बचे लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं, लेकिन उनकी बातों में
उस शाम की दहशत साफ है।
हम आठ लोग क्रूज पर सवार थे। उसमें कुल
45-50 लोग थे, जिनमें महिलाएं और बच्चे ज्यादा थे। शुरुआत में मौसम सामान्य
था, लेकिन लौटते वक्त अचानक तूफान आ गया। पहले हलचल हुई, फिर लहरें तेज
हुईं। कुछ ही मिनटों में हालात बेकाबू हो गए और क्रूज हिचकोले खाने लगा।
ऊपर
बैठे लोगों को नीचे लाया गया। वहां तीन-चार कर्मचारी थे, लेकिन किसी ने
मदद नहीं की। स्थिति बिगड़ने पर हमने खुद लाइफ जैकेट निकाली और लोगों को
पहनाई। अगर ऐसा नहीं करते तो शायद कोई नहीं बचता। बच्चों को एक-एक कर जैकेट
पहनाई। इसी बीच क्रूज में पानी भरने लगा।
पानी में गिरते ही मैंने
पूरी ताकत से ऊपर आने की कोशिश की। सिर और हाथ से जोर लगाकर बाहर निकला।
मैं, मेरी पत्नी और एक 11 साल का बच्चा बाहर आ गए, लेकिन चारों तरफ
अफरा-तफरी थी। हम मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन लाइफ बोट देर से आई। अगर
वह आधे घंटे पहले पहुंचती, तो कई और जिंदगियां बच सकती थीं।
हादसे
के बाद हम साढ़े तीन घंटे तक छोटे बेटे को ढूंढते रहे। उसने लाइफ जैकेट
नहीं पहनी थी। आखिरकार वह सुरक्षित मिला। सच कहूं, मैं मौत को सामने से
देखकर लौटा हूं।
दिल्ली से आई 13 साल की सिया परिवार के साथ गर्मी
की छुट्टियां बिताने जबलपुर आई थी। उन्होंने बरगी डैम में क्रूज की सैर का
सोचा, लेकिन यह फैसला उसकी जिंदगी का सबसे दर्दनाक अनुभव बन गया। शाम 5:30
बजे आखिरी शिफ्ट थी। शुरू में लोग बॉलीवुड गानों पर मस्ती कर रहे थे। तभी
तेज आंधी चली। डैम में समुद्र जैसी ऊंची लहरें उठीं।
पानी क्रूज के
ऊपरी फ्लोर तक पहुंचा। जहाज डगमगाने लगा और लोग घबराए। सिया बताती है कि
लाइफ जैकेट एक केबिन में थे, लेकिन स्टाफ ने नहीं दिए। कुछ लोगों ने खुद
पहन लिए। “मम्मी ने मेरे छोटे भाई त्रिशान को अपने साथ जैकेट में बांध लिया
था। नाना बाहर ही गिर गए थे। मैं बस भगवान से प्रार्थना कर रही थी…”
रातभर
सिया को उम्मीद थी कि मां और भाई बच जाएंगे। लेकिन सुबह उनकी लाशें मिलीं।
दोनों एक-दूसरे से लिपटे थे। इस हादसे ने सिया से मां, छोटा भाई और नानी
छीन लिए।
पाटन के मनोज सेन परिवार के साथ लौटते समय बरगी डैम घूमने
पहुंचे थे। पत्नी ज्योति, बेटी तनिष्का, बेटा तनिष्क, भाई और एक अन्य सदस्य
समेत 6 लोग क्रूज में सवार हुए। साढ़े तीन बजे सब क्रूज पर थे। अंदर गाने
बज रहे थे और माहौल खुशनुमा था। तभी आंधी आई और क्रूज बेकाबू हो गया।
तनिष्का
बताती है,“हम सब ऊपर थे। पापा ने कहा सब एक-दूसरे का हाथ पकड़ लो। पापा ने
भाई और चाचा का हाथ पकड़ा, मम्मी ने हमें पकड़ा हुआ था… तभी क्रूज पलट
गया।” चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। कोई तैर नहीं पा रहा था। ऐसा लग रहा था
जैसे कोई नीचे खींच रहा हो। रेस्क्यू टीम ने उन्हें बाहर निकाला, लेकिन
उनकी मां ज्योति सेन को नहीं बचाया जा सका।
खमरिया ऑर्डिनेंस
फैक्ट्री में काम करने वाले कामराज का परिवार भी हादसे की चपेट में आया।
रिश्तेदार तमिलनाडु से आए थे और सभी ने क्रूज पर जाने का प्लान बनाया। 9
लोग क्रूज पर सवार हुए। हादसे में पत्नी काकुलझी की मौत हो गई। भाभी
सौभाग्यम भी नहीं रहीं। कामराज और उनका बेटा श्री तमिल अब भी लापता हैं।
भतीजा
श्री मयूरम भी नहीं मिला। सबसे दर्दनाक बात, कामराज के माता-पिता क्रूज पर
नहीं गए थे। वे किनारे से अपने परिवार को लहरों में फंसते देखते रहे,
लेकिन कुछ नहीं कर सके।



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