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बड़ा राजनीतिक झटका: गौरव गोगोई को जोरहाट में हार, बीजेपी का झंडा बुलंद

  नई दिल्ली । असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल मानी जाने वाली जोरहाट ...

 

नई दिल्ली । असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल मानी जाने वाली जोरहाट विधानसभा सीट पर कांग्रेस को करारा झटका लगा है। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और दिग्गज नेता गौरव गोगोई को अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में पराजय का स्वाद चखना पड़ा है। उन्हें भाजपा के अनुभवी नेता और पूर्व स्पीकर हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने लगभग 20,000 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त दी है।
अनुभव के सामने नहीं चला गौरव का जादू

जोरहाट की यह जंग 'अनुभव बनाम नई पहल' के रूप में देखी जा रही थी। गौरव गोगोई, जो वर्तमान में सांसद हैं, पहली बार विधानसभा की दहलीज लांघने की कोशिश कर रहे थे। वहीं, हितेंद्र नाथ गोस्वामी इस क्षेत्र के पुराने खिलाड़ी रहे हैं। यह उनकी पांचवीं जीत है। गोस्वामी ने तीन बार असम गण परिषद (AGP) और अब लगातार तीसरी बार भाजपा के टिकट पर इस सीट को अपने नाम कर अपनी 'अजेय' छवि को बरकरार रखा है।

क्यों अहम थी गोगोई के लिए यह सीट?

अहोम समुदाय के गढ़ के रूप में जानी जाने वाली जोरहाट सीट गौरव गोगोई के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न थी। इसके कई कारण थे:

संसदीय क्षेत्र: यह क्षेत्र गोगोई के संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है, जहां से वे लोकसभा सांसद हैं।
नेतृत्व की साख: कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर उनकी जीत पार्टी के भीतर उनके कद को और मजबूत करती।
विकल्प की तलाश: इस जीत के जरिए गोगोई खुद को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के विकल्प के तौर पर पेश करना चाहते थे।

भाजपा की रणनीति और अहोम गढ़ में सेंध

9 अप्रैल को हुए मतदान के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि क्या भाजपा अहोम बहुल इस सीट पर अपनी पकड़ बनाए रख पाएगी। हितेंद्र नाथ गोस्वामी की जीत ने यह साफ कर दिया है कि भाजपा का सांगठनिक ढांचा और विकास का एजेंडा मतदाताओं के बीच गहराई तक पहुंचा है। 20,000 वोटों का अंतर यह दर्शाता है कि भाजपा विरोधी लहर बनाने की कांग्रेस की कोशिशें जोरहाट में नाकाम साबित हुईं।

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