रायपुर। प्रदेश बेटियों की मुस्कान के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी-सेक्स रेशियो एट बर्थ) के मामले में 974...
रायपुर।
प्रदेश बेटियों की मुस्कान के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। जन्म के समय
लिंगानुपात (एसआरबी-सेक्स रेशियो एट बर्थ) के मामले में 974 (प्रति 1000
पुरुष) के प्रभावशाली आंकड़े के साथ प्रदेश देशभर में अव्वल है। राष्ट्रीय
औसत 929 से कहीं आगे यह उपलब्धि बताती है कि राज्य में अब बेटी का जन्म बोझ
नहीं बल्कि उत्सव माना जाने लगा है।
जहां कभी समाज में बेटे-बेटी
के बीच फर्क साफ दिखाई देता था, वहीं आज प्रदेश बेटियों की मुस्कान में
देशभर में अव्वल है। गर्भाधान पूर्व व प्रसव पूर्व निदान तकनीक
(पीसीपीएनडीटी) अधिनियम के सख्त क्रियान्वयन ने कन्या भ्रूण हत्या पर
प्रभावी रोक लगाई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अल्ट्रासाउंड केंद्रों की
नियमित जांच, पंजीयन और निगरानी से कानून केवल कागजों तक सीमित नहीं रहा,
बल्कि जमीन पर असर दिखा रहा है।
सामाजिक चेतना को नई दिशा
राज्य
में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों ने सामाजिक चेतना को नई दिशा दी
है। स्कूलों, आंगनबाड़ियों, स्वास्थ्य केंद्रों और गांव-गांव में चलाए जा
रहे जागरूकता कार्यक्रमों से लोगों की सोच बदली है। अब बेटियों के जन्म पर
डर नहीं, बल्कि भविष्य की उम्मीद दिखाई देती है।
स्वास्थ्य विभाग के
अधिकारियों का कहना है कि कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम, लिंग आधारित
भेदभाव के उन्मूलन और किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए निरंतर जन-जागरूकता
अभियान संचालित किए जा रहे हैं। राज्य के सभी जिलों में निगरानी व्यवस्था
को और सुदृढ़ करने, नियमित समीक्षा और अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर अनिवार्य
सूचना प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण पर विशेष ध्यान
नीति
आयोग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार देश में जन्म के समय लिंगानुपात में
सुधार हुआ है, जिसमें प्रदेश की भूमिका उल्लेखनीय रही है। राज्य में
संचालित बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों के साथ-साथ किशोरियों के
स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग
और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से निरंतर जन-जागरूकता अभियानों के
माध्यम से लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में प्रयास किए जा
रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा
श्याम बिहारी
जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 974 का लिंगानुपात इस बात का प्रमाण
है कि प्रदेश में बेटियों के सम्मान और संरक्षण को लेकर सामूहिक प्रयास सफल
हो रहे हैं। यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों, जिला प्रशासन, महिला
समूहों और जनप्रतिनिधियों की मेहनत का नतीजा है। आज प्रदेश की पहचान सिर्फ
संसाधनों या योजनाओं से नहीं, बल्कि उस संवेदनशील सोच से बन रही है,
जिसमें हर बेटी को समान अधिकार, बेहतर स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य का हक
मिल रहा है।-
प्रमुख राज्यों का लिंगानुपात (स्रोत- एसआरएस 2021-23)
छत्तीसगढ़–
974, केरल– 971, हिमाचल प्रदेश– 958, आंध्र प्रदेश– 943, असम– 938,
तमिलनाडु– 933, कर्नाटक– 931, पश्चिम बंगाल– 931, जम्मू-कश्मीर– 929,
झारखंड– 925, ओडिशा– 923, राजस्थान– 919, मध्य प्रदेश– 917, उत्तर प्रदेश–
916, तेलंगाना– 908, पंजाब– 906, गुजरात– 900, बिहार– 897, महाराष्ट्र–
894, हरियाणा– 884, दिल्ली– 872, उत्तराखंड– 868



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