रायपुर । हेम-2 पोर्टल के सकत नियमों से आधे से ज़्यादा हॉस्पिटल में ऑपरेशन भी हो जाएँगे बंद! दिनांक 24 जनवरी 2026, शनिवार, को शाम 4 बजे पं...
दिनांक
24 जनवरी 2026, शनिवार, को शाम 4 बजे पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज,
रायपुर के लेक्चर हॉल में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) रायपुर की जनरल
बॉडी मीटिंग का आयोजन किया गया। बैठक में रायपुर आईएमए के सभी सदस्य एवं
पदाधिकारीगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
बैठक
में मुख्य रूप से आईएमए रायपुर के सदस्यों द्वारा संचालित अस्पतालों को आ
रही गंभीर समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। चर्चा के दौरान तीन प्रमुख
बिंदुओं को केंद्र में रखा गया—
आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत किए गए इलाज का भुगतान लंबे समय से लंबित होना।
भविष्य में रेट रिवीजन नहीं होने से अस्पतालों को हो रहे आर्थिक नुकसान पर चिंता।
HAM
2.0 पोर्टल, HPR ID पंजीयन तथा चिकित्सकों को केवल दो-तीन स्थानों पर ही
कार्य करने की बाध्यता जैसे नए नियमों से उत्पन्न कठिनाइयाँ।
बैठक
में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि शासन-प्रशासन पर अविलंब
दबाव बनाया जाए, ताकि आयुष्मान योजना के अंतर्गत रुके हुए भुगतान तुरंत
जारी हों। आईएमए रायपुर ने बताया कि योजना के प्रावधानों के अनुसार 21
दिनों के भीतर इलाज का भुगतान किया जाना अनिवार्य है, किंतु इस नियम का
पालन न होने के कारण कई अस्पतालों को अपना संचालन बंद करने की स्थिति का
सामना करना पड़ रहा है, जिससे आम जनता को चिकित्सा सुविधाओं से वंचित होना
पड़ रहा है।
बैठक
में यह भी बताया गया कि वर्ष 2022 से अब तक के भुगतान या तो पेंडिंग में
डाले गए हैं, या विभिन्न कारणों से रिजेक्ट कर दिए गए हैं, अथवा पोर्टल से
हटा दिए गए हैं। यदि यह भुगतान समय पर मिलते, तो अस्पताल अपने संसाधनों का
विस्तार कर सकते थे—जैसे सीटी स्कैन, सोनोग्राफी, एंडोस्कोपी,
कोलोनोस्कोपी, एमआरआई जैसी आधुनिक मशीनों की स्थापना।
आईएमए
रायपुर ने चिंता व्यक्त की कि भुगतान में देरी, रेट रिवीजन न होना और नए
पोर्टल संबंधी नियमों के कारण अस्पतालों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा
रही है। डॉक्टर न तो नए चिकित्सक रख पा रहे हैं, न ही स्टाफ को समय पर वेतन
दे पा रहे हैं, और न ही बिजली-पानी जैसे मूलभूत खर्च उठा पा रहे हैं।
बैठक
में यह भी याद दिलाया गया कि कोविड-19 महामारी के दौरान निजी अस्पतालों ने
अपनी जान जोखिम में डालकर शासन-प्रशासन के साथ मिलकर चिकित्सा सेवाएँ दी
थीं, लेकिन आज उन्हीं संसाधनों के रखरखाव के लिए आवश्यक भुगतान नहीं किया
जा रहा है।
आईएमए
रायपुर ने आशंका जताई कि यह स्थिति कहीं न कहीं छोटे और मध्यम अस्पतालों
को कमजोर कर कॉर्पोरेट अस्पतालों को बढ़ावा देने की नीति का संकेत देती है,
जो जनहित के विरुद्ध है। संगठन ने कहा कि जब तक अस्पताल आर्थिक रूप से
सशक्त नहीं होंगे, तब तक समाज को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएँ नहीं मिल
सकतीं।
अंत
में आईएमए रायपुर ने शासन-प्रशासन से मांग की कि इन मुद्दों पर तत्काल
संज्ञान लेकर समाधान किया जाए, अन्यथा चिकित्सक वर्ग चरणबद्ध तरीके से
आयुष्मान योजना से अलग होने पर विचार करने को मजबूर होगा, जिसकी सम्पूर्ण
जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी ।



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