रायपुर। खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब यह सामने आया कि वर्ष 2021 से दर्ज मिलावट के कई प्रकरण आज तक ...
रायपुर। खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब यह सामने आया कि वर्ष 2021 से दर्ज मिलावट के कई प्रकरण आज तक अदालत तक नहीं पहुंच पाए हैं। नियमानुसार जांच के बाद अभियोजन स्वीकृति लेकर मामलों को न्यायालय में प्रस्तुत करना जरूरी होता है, लेकिन करीब चार से पांच साल पुराने कई मामलों में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। इससे आरोपितों को कानूनी लाभ मिलने की आशंका बढ़ गई है।
सूत्रों के अनुसार दर्जनभर से अधिक मामलों में केवल प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई रोक दी गई। नियम के तहत प्रकरण बनाने के बाद अभियोजन स्वीकृति लेकर आगे की कार्रवाई के लिए फाइल प्रस्तुत करना अनिवार्य है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्रावधान है कि निर्धारित समय सीमा में मामला कोर्ट में पेश नहीं होने पर आरोपित पक्ष को राहत मिल सकती है। ऐसे में वर्षों से लंबित प्रकरण विभागीय लापरवाही की ओर इशारा कर रहे हैं।
नकली पनीर से लेकर मिलावटी मिठाई तक मामले अटके
कुशालपुर क्षेत्र में एक फैक्ट्री से नकली पनीर पकड़ा गया था, लेकिन उसका प्रकरण भी अब तक न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया। इसी तरह अन्य होटल और रेस्टोरेंट में मिलावटी बेसन, बूंदी के लड्डू और पुराने तेल से खाद्य सामग्री तैयार करने के मामलों में कार्रवाई तो हुई, लेकिन आगे कानूनी प्रक्रिया नहीं बढ़ाई गई।
कई प्रतिष्ठानों के मामले लंबित
जिन मामलों में अब तक अभियोजन स्वीकृति नहीं ली गई, उनमें एक्सपायरी सॉस और मिस ब्रांडेड खाद्य सामग्री के उपयोग, दूध और मिल्क प्रोडक्ट में लेबलिंग गड़बड़ी, मानकों से कम गुणवत्ता वाली मिठाइयों और मिलावटी नमकीन के प्रकरण शामिल बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में देरी सीधे-सीधे जांच की गंभीरता पर सवाल खड़े करती है।
विशेषज्ञ बोले, इतनी देरी सामान्य नहीं
खाद्य सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि मल्टी पार्टी मामलों में नोटिस और पूछताछ की प्रक्रिया में एक-दो महीने का समय लग सकता है, लेकिन होटल या रेस्टोरेंट जैसे एकल स्वामित्व वाले मामलों में कार्रवाई जल्दी पूरी हो जाती है। ऐसे में वर्ष 2021 जैसे पांच साल पुराने प्रकरणों का लंबित रहना सामान्य प्रशासनिक देरी नहीं माना जा सकता।
ट्रांसफर आदेश के बाद भी जमे खाद्य सुरक्षा अधिकारी
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा 10 फरवरी को ट्रांसफर के आदेश के बाद भी एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी के रायपुर में ही बने रहने से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। दस दिन बाद भी उन्होंने नई पदस्थापना ग्रहण नहीं की। अधिकांश स्थानांतरित अधिकारी समय पर रिलीव होकर नए जिलों में ज्वाइन कर चुके हैं, जबकि संबंधित अधिकारी रायपुर में लंबित प्रकरणों को निपटाने में लगी बताई जा रही हैं। इसी बीच पुराने मिलावट मामलों में कार्रवाई लंबित होने और अभियोजन स्वीकृति नहीं लेने के आरोप भी चर्चा में हैं।
लंबित मिलावट प्रकरणों की सूची
मेसर्स बारबेक्यू नेशन - 24 अगस्त 2021
मामला: मिस ब्रांडेड
अनियमितता: एक्सपायर हो चुके सॉस एवं अन्य खाद्य सामग्री का उपयोग।
मेसर्स आनंद फ्रेश भिलाई फूड प्रोडक्ट्स कंपनी - 26 जुलाई 2021
मामला: मिस ब्रांडेड
अनियमितता: दूध एवं मिल्क प्रोडक्ट में एक्सपायरी डेट और आवश्यक विवरण का अभाव।
मेसर्स पूनम स्वीट्स, जय स्तंभ चौक - 16 अक्टूबर 2024
मामला: सब स्टैंडर्ड एवं मिस ब्रांडेड
अनियमितता: बूंदी के लड्डू खाद्य मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।
मेसर्स मुरली स्वीट हाउस, सुंदर नगर - 16 अक्टूबर 2024
मामला: सब स्टैंडर्ड एवं मिस ब्रांडेड
अनियमितता: बेसन के लड्डू गुणवत्ता और खाद्य मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।
मेसर्स सफायर फूड्स इंडिया लिमिटेड, मैग्नेटो मॉल, रायपुर
मामला: खाद्य गुणवत्ता उल्लंघन
अनियमितता: खाना बनाने में पुराना व कई बार उपयोग किया गया तेल इस्तेमाल किया जा रहा था।
मेसर्स जलाराम नमकीन, अग्रसेन चौक - 18 मार्च 2024
मामला: सब स्टैंडर्ड (मिलावटी)
अनियमितता: गाठिया बेसन का नमूना मानकों से कम गुणवत्ता वाला पाया गया।



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