नई दिल्ली । अमेरिका की मध्यस्थता में चल रही युद्ध-विराम कोशिशों के तहत रूस और यूक्रेन के बीच अबूधाबी में शनिवार को लगातार दूसरे दिन बात...
नई
दिल्ली । अमेरिका की मध्यस्थता में चल रही युद्ध-विराम कोशिशों के तहत रूस
और यूक्रेन के बीच अबूधाबी में शनिवार को लगातार दूसरे दिन बातचीत हुई।
दोनों देशों ने चर्चा को सकारात्मक बताया और आगे भी संवाद जारी रखने के
संकेत दिए। कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने जानकारी दी कि दोनों देशों के
शीर्ष नेताओं से बातचीत के बाद एक फरवरी (रविवार) को अगली त्रिपक्षीय
वार्ता प्रस्तावित की गई है।
इसी बीच अमेरिकी दूत स्टीव विटकाफ और
अमेरिकी राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुशनर मास्को पहुंचे, जहां उन्होंने
युद्ध समाप्ति को लेकर व्लादिमीर पुतिन से करीब चार घंटे तक बातचीत की।
हालांकि, बातचीत से बने सकारात्मक माहौल को शुक्रवार-शनिवार की रात रूस के
बड़े हमलों ने झटका दे दिया।
यूक्रेन के ऊर्जा संयंत्रों को भारी नुकसान
रूसी
मिसाइल और ड्रोन हमलों में यूक्रेन के ऊर्जा संयंत्रों को भारी नुकसान
पहुंचा है। कड़ाके की ठंड के बीच दस लाख से अधिक लोग बिजली आपूर्ति से
वंचित हो गए हैं। इन हमलों में एक व्यक्ति की मौत और 31 लोगों के घायल होने
की पुष्टि हुई है। यूक्रेन ने इन हमलों की तीखी आलोचना की है।
अबूधाबी
में तीनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में कोई ठोस फैसला नहीं हो
सका और न ही कोई संयुक्त बयान जारी किया गया। हालांकि, यूएई ने बातचीत को
सकारात्मक और संतुलित माहौल में हुई चर्चा बताया। वहीं, कीव ने साफ कर दिया
है कि वह डोनबास क्षेत्र लुहांस्क और डोनेस्क में अपने नियंत्रण वाली जमीन
छोड़ने को तैयार नहीं है। इसके उलट, रूस पूरे डोनबास पर नियंत्रण की मांग
पर अड़ा हुआ है।
डोनबास को पूरी तरह छोड़ने की मांग यूक्रेन के सामने
रूस
ने युद्ध समाप्ति की शर्त के तौर पर डोनबास को पूरी तरह छोड़ने की मांग
यूक्रेन के सामने रखी है। चार वर्षों से जारी संघर्ष में रूस पहले ही इस
औद्योगिक और खनिज-समृद्ध क्षेत्र के करीब 90 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर
चुका है।
शनिवार की वार्ता से पहले रूस ने रात के समय यूक्रेन की
राजधानी कीव और प्रमुख शहर खार्कीव पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले
किए। इस दौरान रूसी सेना ने यूक्रेन के उत्तर-पूर्वी इलाके के एक और गांव
पर नियंत्रण का दावा किया है।
बातचीत की प्रक्रिया पर भी सीधा हमला
यूक्रेन
के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने इन हमलों को बर्बर करार देते हुए कहा कि
ये हमले सिर्फ आम नागरिकों पर नहीं, बल्कि बातचीत की प्रक्रिया पर भी सीधा
हमला हैं। विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हमलों के बावजूद यूक्रेन
फिलहाल वार्ता से पीछे हटने की स्थिति में नहीं है।
युद्ध जल्द समाप्त करने का दबाव
अमेरिका
की ओर से युद्ध जल्द समाप्त करने का दबाव और नाटो के भीतर बढ़ते मतभेदों
के चलते यूरोपीय देशों की सीमित सैन्य सहायता, इन सबके बीच यूक्रेन की
स्थिति कमजोर होती दिख रही है। दावोस में डोनाल्ड ट्रंप और वोलोदिमीर
जेलेंस्की दोनों ही युद्ध समाप्ति के पक्ष में बयान दे चुके हैं। ऐसे हालात
में रूस मौजूदा परिस्थिति का अधिकतम लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।



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